
वक़्त किसका हुआ बोलो
वक्त ने साथ किसका दिया
न वो माझी का हो पाया
न होगा आते कल का .....
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वक़्त की बंदगी को
तडीपार करा आया हूँ
वक्त के गुनाहों को सज़ा
इक्तियार करा आया हूँ ....
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वक़्त ने रुक के कभी
कल न साथ दिया ,
कल के सब गिले-शिकवे
सब आंसू मिटा आया हूँ ....
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अब .....
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वक़्त से आगे बढ के
खुदी बुलंद कर आया हूँ
कल के कश-म-कश को
आज से बुझा आया हूँ .........
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जियू में आज में ऐसे की
आते कल की परवाह नहीं
जो रहा नहीं कल उसकी
यहाँ कोई जगह ही नहीं ......
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आज हो , आज है
आज ही हो बस
यही मनन मैं करूँ
यही कामना हो मेरी
और
मैं जी लूँ इक सदी
इस आज में ही ..........
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इस आज में तू है
तू हो तू ही हो हमेशा ...
जिस कल में तू नहीं था
जिस कल में तू नहीं हो
ऐसे कल की हमें परवाह नहीं.....
*
बस आज है, आज हो
आज ही हो न प्रिय
इस आज में मैं जी लूं
इक सदी भर को
तेरी साँसों का सानिध्य लिए ....
*
और एक मन जोत लौ बन जग जाए हम .


