आओ एक नया जहाँ बसाए
इक दूजे में हम समां जाये
अब दुनिया से मन भर गया हे
कुछ सपनो की दीवारे बनाए
हसीं खयालों से उन्हें सजाए
ईंट पत्थर से ना हो वास्ता
आओ कुछ मिटटी गारा ले आये
कुछ तुमसा कुछ मुझसा बनाए
अब खिलोने से दिल भर गया
आओ कहीँ दूर निकल जाये
शांति और अमन को अपनाए
ख़ून खराबे से हो किसका भला
कुंआरी उम्र की देहरी पर
1 महीना पहले


